कफ़न की ख़ामोशी को शमसान क्या जाने



कफ़न की ख़ामोशी को शमसान क्या जाने,
महकते हुए चमन को वीरान क्या जाने,
क्यों बरसती है ये बदनसीब आखें,
इन आंसुओ की कीमत रेगिस्तान क्या जाने.

Comments

Anonymous said…
woww! great i think someone broke your heart.love?

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